गुस्ताख़ियाँ भी हों तो बहुत एहतराम से,
हर बात कही जाए मगर पूरे मुक़ाम से।
मुस्कुराता जो मिला, उसको सज़ा दी जाएगी,
हर हँसी की अब यहाँ क़ीमत चुका दी जाएगी।
आँसुओं की इस क़दर क़ीमत बढ़ा दी जाएगी,
दर्द की हर दास्ताँ महँगी बना दी जाएगी।
जो छुपाए फिर रहा है अपने सीने में तूफ़ाँ,
उसकी ख़ामोशी भी एक दिन सुना दी जाएगी।
महफ़िलों में जो हँसी के फूल बरसाते रहे,
वक़्त आने पर वही तन्हा नज़र आएँगे।
ज़ख़्म देकर जो बड़े इत्मीनान से चलते रहे,
आईना दिखलाने की बारी भी अब आएगी।
अदब से पेश आना कमज़ोरी समझना मत कभी,
हम भी लहजे में ज़रूरत भर असर रखते हैं।
मुस्कुराकर हर सितम सहते हैं हम तो इस तरह,
लोग क्या जानें कि, सीने में दिल किधर रखते हैं।
-रतन कुमार कैथवास
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