आप होमिओपैथी की दवा बन जाओ,
ठीक न कर सको, तो ख़राब भी न करो।
यही बात एक बुज़ुर्ग ने चौपाल में मुस्कुराकर कही थी,
लोग पहले हँसे, फिर देर तक उसके मायने सोचते रहे।
हर लड़ाई जीत लेना ही, समझदारी नहीं होती,
कभी किसी के दर्द को और न बढ़ाना भी, फ़तह होती है।
धूप ने पेड़ से पूछा, "तेरा सबसे बड़ा हुनर क्या है?"
पेड़ बोला, "जो मेरी छाँव में आया, उसे और नहीं जलाया।"
दरिया ने भी किनारों से यही रिश्ता निभाया,
जिसे डुबो न सका, उसे सकुशल पार तो लगाया।
हर इंसान मसीहा नहीं बन सकता इस दुनिया में,
मगर किसी के लिए ज़हर बन जाना भी ज़रूरी नहीं होता।
एक मुसाफ़िर रास्ता पूछने आया था शाम ढले,
मैं मंज़िल न बता सका, मगर उसे भटकाया भी नहीं।
रिश्ते अक्सर इलाज से नहीं, एहतराम से बच जाते हैं,
ज़ुबान की एक नरमी कई ज़ख़्म सिल देती है।
अगर फूल नहीं बन सकते, तो काँटे भी मत बनो,
राहगीरों के पाँव कम-से-कम लहूलुहान तो न करो।
याद रखना…
हर नेक काम तालियाँ नहीं माँगता,
कई बार सबसे बड़ी नेकी बस इतनी होती है…
किसी की टूटी हुई दुनिया में अपनी वजह से,
एक और दरार न पड़ने देना।
-रतन कुमार कैथवास
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