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एक गिलास गन्ने का रस

                
                                                         
                            पुदीने वाला गन्ने का रस पीने के बाद,
                                                                 
                            
तो जून की दुपहरी में भी,
कलेजे को ठंडक मिल जाती है।

अब बताओ, सुबह घर पर, किस बात पर लड़ रहे थे?
पहले ये रस पीओ… मैंने हौले से उससे कहा।
परंतु वो जहाँ रुक जाती है,
तो अपने सवाल का जवाब जब तक नहीं आता,
तब तक किसी और बात पर… नो डिस्कशन।

मैंने मुस्कुराकर गिलास उसकी ओर बढ़ाया,
बर्फ की डलियाँ ऊपर ऊपर तैर रही थीं,
पुदीने की खुशबू,
हवा में धीरे-धीरे घुल रही थी।
वो बोली…
"रस तो बाद में पी ही लूँगी,
पहले पूरा सच बताओ।"

मैंने हँसकर कहा…
"अरे जनाब!
इतनी गर्मी में अदालत भी, दोपहर तक मुल्तवी हो जाती है,
तुम तो बिना पानी पिए ही, फैसला सुनाना चाहती हो।"
उसने भौंहें चढ़ाकर कहा…
"मुझे तारीख़ नहीं चाहिए,
सीधा बयान चाहिए।"

मैंने गन्ने वाले से कहा…
"भैया, ज़रा नींबू थोड़ा और डालना,
आज मिठास कम पड़ने वाली है।"
गन्ने वाला मुस्कुरा दिया,
शायद उसे समझ आ गया था,
कि यहाँ रस से ज़्यादा,
रिश्ते को बचाने की कोशिश चल रही है।
मैंने फिर कहा…
"देखो,
हर लड़ाई का कारण बड़ा नहीं होता,
कई बार थकान बोलती है,
और हमें लगता है कि इंसान बोल रहा है।"

वो बोली…
"ये दर्शन-शास्त्र बाद में सुनाना,
सुबह की बात पर आओ।"
मैंने गिलास उसके हाथ में रख दिया।
"एक घूँट पी लो,
फिर जितने सवाल पूछने हैं पूछ लेना।"
उसने अनमने मन से
एक घूँट पी लिया।

शायद पुदीने ने अपना काम कर दिया था।
आवाज़ पहले से धीमी हो गई।
वो बोली…
"अब बताओ।"
मैंने कहा…
"सुबह घर में कोई युद्ध नहीं था,
बस दो लोग,
अपनी-अपनी बात सही साबित करने में लगे थे।


एक को शब्दों पर भरोसा था,
दूसरे को अपने इरादों पर।
आवाज़ें ऊँची हुईं,
मगर नीयत आज भी वैसी ही थी।"
वो, कुछ पल चुप रही।
फिर गिलास का आख़िरी घूँट पीकर बोली…
"अच्छा...
मतलब गुस्सा, रिश्ते पर नहीं था,
बस वक़्त पर था?"
मैंने मुस्कुराकर कहा…
बिल्कुल।

जून की धूप हो,
या रिश्तों की तपिश,
दोनों में एक बात समान है…
थोड़ी-सी ठंडक,
थोड़ा-सा धैर्य,
और दो मीठे बोल,
कई बार पूरे मौसम का, मिज़ाज बदल देते हैं।
वो हँसी और बोली…
"अगली बार याद रखना,
गन्ने का रस पहले नहीं,
सच पहले।"

मैंने खाली गिलास मेज़ पर रखते हुए कहा…
और तुम भी याद रखना…
हर सवाल का जवाब उसी पल मिल जाए,
तो ज़िंदगी में इंतज़ार नाम की नेमत कौन सीखे?
कभी-कभी एक गिलास गन्ने का रस,
जवाब नहीं देता,
मगर जवाब सुनने का मिज़ाज ज़रूर बना देता है।
-रतन कुमार कैथवास
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2 महीने पहले

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