आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ड्राई आइस

                
                                                         
                            ड्राइ आइस का प्रोसेस क्या है,
                                                                 
                            
जल्दी तुम बतलाओ मुझे।
ज्ञान की इस छोटी राह में,
थोड़ा साथ निभाओ मुझे।

फिर वो हँसकर पास ही बैठा,
बोला सुन समझाऊँ तुझे।
"ये बर्फ़ नहीं, जमी गैस है,
पहले इतना जान ले तू।"

कार्बन डाइऑक्साइड गैस को,
बहुत दबाव में लाया जाता।
ठंडा करके द्रव बनाया,
फिर दबाव हटाया जाता।


जो कुछ हिस्सा बर्फ़ बन जाता,
उसे सभी अपनाते हैं।
सफ़ेद-सफ़ेद वो सूखी बर्फ़,
साँचे में दबाई जाती है।


ब्लॉक बने या छोटे पेलेट,
ज़रूरत से ढाली जाती है।
हाथ लगाना भूल न जाना,
दस्ताने पहनाए जाते हैं।

मैंने पूछा, "पानी बनकर
ये फिर क्यों नहीं बहती है?"
वो मुस्काकर धीरे बोला,
"यही इसकी ख़ासियत रहती है।

सीधे गैस में बदल जाती,
इसको 'उर्ध्वपातन' कहते हैं।"
तब समझ आया विज्ञान भी,
कितना सुंदर किस्सा है।

जो धैर्य से हर बात सुने,
उसका हर दिन अच्छा है।
प्रश्न अगर मन से निकले हों,
उत्तर भी मुस्काते हैं।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर