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दूर गगन में बिजली कौंधी

                
                                                         
                            दूर गगन में बिजली कौंधी, चिंता की कोई बात नहीं है,
                                                                 
                            
बादल अपना पानी डिकैन्ट कर रहा, कोई बरसात नहीं है।

पहले अर्थिंग वायर लगाना, फिर बादल को खाली करना,
धरती से उसका रिश्ता जोड़ो, इसमें कोई घात नहीं है।

पानी जब तलछट छोड़ रहा हो, धैर्य ज़रा तुम रखना,
ऊपर साफ़ दिखाई दे जो, नीचे वैसी बात नहीं है।

डिकैन्टेशन के उस क्षण में, हल्की चिंगारी उठती है,
बादल और धरती के बीच बस इतनी-सी मुलाक़ात सही है।

जो चमक रही है दूर गगन में, उसको तूफ़ान न समझो,
प्रकृति अपने काम में व्यस्त है, इसमें कोई आफ़त नहीं है।

बिजली केवल संदेशा देती… “बादल अब हल्का होगा,”
थोड़ी देर में बरस पड़ेगा, इसमें कोई शक की बात नहीं है।

आसमान भी अपने ढंग से अपना हिसाब चुकाता है,
बादल पानी डिकैन्ट करे तो बिजली उसकी सौगात सही है।

दूर गगन में बिजली कौंधी, चिंता की कोई बात नहीं है,
बादल अपना पानी डिकैन्ट कर रहा… बस इतनी-सी बात सही है।
-रतन कुमार कैथवास
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2 घंटे पहले

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