डाल के लंगर, कुछ देर ठहर जा,
सपनों में तू तैर ज़रा सा।
दुनिया की दौड़ बहुत देखी तूने,
अपने भीतर भी लौट ज़रा सा।
मंज़िल के पीछे भाग रहा है,
राहों को भी निहार ज़रा सा।
हर पल जीतना ज़रूरी कब है,
हारों में भी कुछ हार ज़रा सा।
लहरें आएँगी, लौट भी जाएँगी,
मन को कर ले पार ज़रा सा।
जो बीत गया, उसे जाने दे अब,
खुद को भी कर ले प्यार ज़रा सा।
रिश्तों की नाव किनारे बाँधकर,
अपनों के संग बैठ ज़रा सा।
जिन आँखों ने तुझको चाहा है,
उन आँखों में झाँक ज़रा सा।
कल की चिंता कल पर छोड़ दे,
आज को कर स्वीकार ज़रा सा।
जीवन केवल दौड़ नहीं है,
इसका भी ले स्वाद ज़रा सा।
डाल के लंगर, कुछ देर ठहर जा,
साँसों को दे आराम ज़रा सा।
सपनों में तू तैर ज़रा सा,
फिर दुनिया से भी खेल ज़रा सा।
-रतन कुमार कैथवास
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