तेरी आँखों के लाल डोरे, रात की कहानी कहते हैं,
दिल में उठते तूफ़ानों की, ख़ामोशी में रवानी कहते हैं।
बात करने का मन हो तो, फ़ोन मिला लिया करो,
क्यों तन्हाई में बैठकर, ख़ुद को यूँ सज़ा दिया करो।
तेरी बेचैनी चेहरे से, साफ़ नज़र आ जाती है,
हँसती आँखों के पीछे भी, उदासी ठहर जाती है।
दिल में कोई बात हो तो, मुझसे कह लिया करो,
क्यों अपने ही ख़ून को, यूँ बेवजह न जलाया करो।
न कोई शर्त रखी है मैंने, न कोई हिसाब माँगा है,
तेरी ख़ामोशी से बस, तेरे दिल का जवाब माँगा है।
जब याद मेरी सताए तो, आवाज़ लगा दिया करो,
क्यों रातों की नींद खोकर, ख़ुद को न तड़पाया करो।
नाराज़गी अपनी जगह है, मगर ये कैसी दूरी है,
दिल में इतनी चाहत लेकर, लबों पर इतनी मजबूरी है।
दो बोल सुनने हों मेरे, तो फ़ोन घुमा लिया करो,
क्यों आँखों की नींद खोकर, रात भर आँसू बहाया करो।
तेरी आँखों के लाल डोरे, मुझसे कुछ छुपाते नहीं,
तेरे दिल के हालात मुझसे, ज़्यादा देर छुप पाते नहीं।
इश्क़ है तो इश्क़ की बात, खुलकर बता दिया करो,
ख़ून जलाने से क्या हासिल, बस फ़ोन मिला लिया करो!
-रतन कुमार कैथवास
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