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अपनी सारी उम्र लुटा दूँ

                
                                                         
                            तेरी आँखों से मैं नींद भगा दूँ,
                                                                 
                            
माथे की तक़दीर जगा दूँ,
सपनों की मैं टीस मिटा दूँ,
तेरे होंठों पर हँसी सजा दूँ।

जो ख़्वाब तेरे रूठ गए हैं,
उनको फिर से पास बुला दूँ,
जो आँसू पलकों पर ठहरे,
उनको मोती बना सजा दूँ।

तेरी राह में काँटे जितने,
सबको चुनकर दूर हटा दूँ,
तू बस एक बार हाथ बढ़ा दे,
मैं दुनिया से तुझको बचा लूँ।

तेरी हर इक ख़ामोशी पढ़कर,
बिन बोले ही बात समझा दूँ,
तू चाहे तो सूनी रातों में,
चाँद सितारे सब ले आ दूँ।

तेरे हिस्से की सारी खुशियाँ,
चुपके से तेरे नाम लिख दूँ,
तू मुस्काए बस एक दफ़ा तो,
अपनी सारी उम्र लुटा दूँ।
-रतन कुमार कैथवास
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एक महीने पहले

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