मुस्कुराहट जवाब में रखना,
दर्द को दिल की किताब में रखना।
वक़्त कितना भी आज़माए तुमको,
हौसला अपने ख़्वाब में रखना।
जो अँधेरों में दीप जलता है,
उसका तूफ़ाँ के ख़ौफ़ से क्या होगा।
सर झुका कर जो बात करता है,
तुमसे वो आदमी बड़ा होगा।
अपनी फ़ितरत में नूर रखना तुम,
दिल में सबके लिए गुंजाइश रखना।
हारकर भी जो हार माने नहीं,
उसके किरदार में कुछ तो खास होगा।
बात तलवार की नहीं होती है,
लफ़्ज़ में भी धार पैना होगा।
जो बड़ों की तरह माफ़ कर दे,
उसके सीने में दिल बड़ा होगा।
अपने चेहरे पे सादगी रखना,
अपनी आँखों में भी, कुछ पानी रखना।
जो किसी के भी काम आ जाए,
उसका जीना ही फिर दुआ होगा।
दौलतों से न क़द बड़ा होगा,
नाम से कब कोई ख़ुदा होगा।
जो झुका दूसरों की ख़ातिर भी,
उससे ऊँचा न कोई खड़ा होगा।
मरहबा, यही ज़िंदगी का उसूल है,
नफ़रतों से न कोई भला होगा।
मुस्कुराहट जवाब में रखना,
तेरा किरदार ही बड़ा होगा।
-रतन कुमार कैथवास
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