बातों में घुल रहे है
यादों में ढल रहे है.!
ख्बावों में मिल रहे है
एहसास साथ साथ चल रहे है.!
तेरे बारे में सोचकर मुस्कुराई हूँ
तुझमें इस कदर समाई हूँ.!
अब खुद से भी होने लगी पराई हूंँ
तुझमें अब खुदको भूल आई हू.!
बंद आँखों में तेरी झलक मिल रही है
जबसे तेरे पास रहकर कुछ वक्त आई हूँ.!
मौसम कर रहा है बेकारर बहुत
उस रात जो भीगे थे साथ हम
वो लम्हें खुद में समैट लाई हूँ.!
दिल बेचैन हो रहा है ख्बाव़ बुन रहा है
फिर साथ जीने की "रश्मि" आरज़ू जाग आई है.!
-रश्मि रावत
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