किरदारों की कगार पूछो
समझदारो की पगार न पूछो
लूट जाते है, वो खाली जेब में भी
कैसे लूटते है ये सवाल न पूछो
खुला है आसमान उनका कितने
गज में सोए थे ज़मीन का वो पैमान न पूछो
खाली जेब चेहरे पर मुस्कान
बस ही दिन कट जाता है
कल की उम्मीद कैसे करे,
जेब देखकर ही खुद का खुद्दार मिट जाता है
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