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आने जाने वालो (दिल्ली से पलायन)

                
                                                         
                            मैं लिखती हूँ कविता उन आने जाने वालों पर,
                                                                 
                            
जो टिक न सके इन बेहकती निगाहों पर,
मैं लिखती हूँ कविता उन आने जाने वालों पर।

बहकती थी मैं, ढूंढते तुम थे मगर,
आंसू थे तूम,
आँखें बनाने मुझे आये थे तुम,
चंद कीचड से डर गये हो जो तुम,
आशियाना बनाने तुम्ही आये थे,
मैं हसती हूँ अब इन आने जाने वालों पर
मैं लिखती हूँ कविता उन आने जाने वालों पर।

थे तुम अंधेरा,
उजाला बनाने मुझ ही को आये थे
यादों मे रहूंगी , जब नजर पडेगी जालों पर,

मैं लिखती हूँ कविता उन आने जाने वालों पर।
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2 वर्ष पहले

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