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जख्मों का दर्द

                
                                                         
                            तूझे क्या मालूम जख्मों का दर्द,
                                                                 
                            
जो राख में भी नफा ढूंढता हो,
जलना तो हमने सीखा है,
जो मिट जाने मे भी तेरा भला ढूंढता हो।

वफा करी है हमने
कोई ढोंग नहीं,
तूझे क्या मालूम, ऐ राख करने वालो,
ज़ो आग से रूबरू हूआ ही नहीं।

वो किसी का मिटाना क्या जाने
जो चिता पर भी कर्जदार ढूंढता हो,

तूझे क्या मालूम जख्मों का दर्द,
जो राख में भी नफा ढूंढता हो।
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2 वर्ष पहले

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