मेरे अंधियारी रात की तुम चांदनी हो ,
तुम मेरी रंभा , उर्वर्शी , कामिनी हो ।
न जाने तेरे ख्वाब में , मैं क्या हूं ,
मेरे ख्वाबों में तो , तू मेरी अर्धांगिनी हो ।।
- रंजीत कुमार महतो "गम्हरा"
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