इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में ,
रानी झांसी शाश्वत है।
पीठ पर था दामोदर ,
मुंह से पकड़ी वाग जिसने।
दोनो हाथों से तलवार चलाई,
वह लक्ष्मीबाई शाश्वत है।
युद्ध भूमि में थी रणचण्डी,
गोरों निमित्त जादूगरनी।
अंग्रेजी सेना में मचाई भगदढ़,
वह रानी झांसी शाश्वत है।
मातृभूमि की रक्षा में,
दी प्राणों की बाजी ।
इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में,
रानी झाॉंसी शाश्वत है।
-अशर्फी लाल मिश्र
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