सिर्फ चुनाव जीतने के लिये
कई दफ़ा ये रेत के महल बनाते हैं
और मतदातााओं को गुमराह करने की कोशिश करते रहते हैं
ये घोषणापत्र को बदनाम करने की कोशिश करते रहते हैं
कोई लाखों की बातें करता है
तो कोई हजारों की
कोई रोजगार की बातें करता है
तो कोई कर्जमाफी की
कोई बड़े - बड़े एलान करता है
तो कोई बिना किसी नियोजन के बखान करता है
तो कुछ अपने ही एलानो को सिर्फ चुनाव जीतने का हथियार समझते रहते हैं
ये घोषणा पत्र को बदनाम करने की कोशिश करते रहते हैं
ऐसे में सवाल उठता है की कैसा हो घोषणा पत्र
घोषणा पत्र में लिखी बातों में नीति और नियोजन होना चाहिए
जो लक्ष्य बनाया है उसका आधार होना चहिये
लक्ष्य को पाने की नियत हो
लक्ष्य को पाने की चाहत हो
इसे पाने की राह कौन सी हो
इस लक्ष्य को पाने की छमता कितनी है
घोषणा पत्र में इन सभी बातो की जवाबदेही तय
होनी चाहिये
सही नियत एवं नीति के साथ लक्ष्य को पाने कोशिश करते रहे
जिससे इनका घोषणा पत्र विकास का आधार बने
और प्रगति और समृद्धि का सार बने
( इस कविता में किसी भी प्रकार से किसी भी दल को नहीं दर्शाया गया है इस कविता के माध्यम से इस बात जोर दिया गया है की घोषणा पत्र में कही
बातो को पूरा करने या उसे पूरा करने के लिये गये निर्णयों एवं की गई कोशिशों जवाबदेही तय हो )
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