जो मनुष्य कभी ध्यान पूर्वक ढूंढता है की क्या है अपने सुख-दुख के कारण प्रमुख,
तो कभी बिन सोचे समझे ही बतला देता है कि सुख-दुख के कारण है अमुख अमुख,
उस मनुष्य को सदा याद रखना चाहिए कि इस झूठी और मायावी दुनिया में,
सब कुछ ही अस्थायी है, कुछ भी नहीं है स्थायी, बड़े से बड़ा सुख हो या फिर की दुख|
-मनस्व
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