नस्ल और जाति से तो दुनिया भर की नजर में आर्यावर्त के आर्य हैं हम,
संस्कार सभ्यता संस्कृति परंपरा की दृष्टि से भी सबके आचार्य हैं हम,
आधुनिक विज्ञान के युग में खुद को अपूर्ण समझने वाले मनुष्य के लिए भी,
वैराग्य ज्ञान बुद्धत्व एवं पूर्णत्व की ओर ले जाने वाले शंकराचार्य हैं हम|
-मनस्व
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