सत्य की खोज करते हुए,
हो सकता है झूठ तुम्हारी टांगों को,
पीछे से खींचे और तुम उससे,
अपनी टांगों को छुड़ाकर आगे बढ़ जाओ,
सत्य की खोज करते हुए,
हो सकता है झूठ तुम्हारे सामने,
सत्य का हूबहू रूप लेकर आ जाए,
और तुम उसे शायद पहचान भी लो,
और अपने दोनों हाथों से उसे धक्का देकर,
आगे भी बढ़ जाओ,
सत्य की खोज करते हुए हो सकता है कि,
सत्य स्वयं अचानक से एक बड़े चट्टान के रूप में,
तुम्हारे ऊपर,
आ गिरे और तुम चकनाचूर हो जाओ...|
सत्य की खोज करते हुए,
हो सकता है सत्य स्वयं तुम्हारे सामने,
एक विशाल समुद्र की भांति सहसा उभर आए,
और तुम उसमें डूब मरो...|
-मनस्व
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