पूरा एक न एक दिन एक-एक ख्वाब होकर रहेगा,
झूठा तू एक न एक दिन बेनकाब होकर रहेगा,
चाहे जितना भी लंबा खिंचे इस स्वप्न की पहेली,
एक न एक दिन इस स्वप्न का भी हिसाब होकर रहेगा|
-मनस्व
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