सचमुच तेरे आगे खड़ी है पीछे खड़ी है बाएं खड़ी है दाएं खड़ी है,
है तो अंततः मृत्यु फिर भी जीवन को अपना आधार बनाए खड़ी है,
सोच ले बिन गुरु की कृपा से तू इस भवसागर से कैसे होगा पार,
जिस भवसागर में माया रूपी वासना हर घड़ी अपना मुंह बाए खड़ी है|
-मनस्व
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