जो झूठ लगा रहता है सच को सदा किसी भी तरीके से हराने की जुगाड़ में,
और जो झूठ वार करता है सच पर कभी सामने से तो कभी छुप करके आड़ में,
वही झूठ प्रेम रूपी एक फूल के सुगंध से सच के जैसे परिपूर्ण होने के बजाय,
फूल को सिर्फ ठीक से जानने के लिए लगा रहता है सदा फूलों के चीर फाड़ में|
-मनस्व
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