सचमुच खुद को दर्द में कुछ इस तरह से है खपाती बोतल,
दर्द की एक आह भी कभी अपनी जुबान पर न लाती बोतल,
जिस मधुशाला की दर पर दुनिया जाकर करती हैं अपने दर्द बयां,
उसी मधुशाला में खुद को हर एक दर्द का दवा है बताती बोतल|
-मनस्व
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X