जब तक कि तेरे इस मन का मैल पूरी तरह से धूलेगा नहीं,
सचमुच तब तक तो तेरे प्रभु का द्वार तेरे लिए खुलेगा नहीं,
जिस लाभ के लिए तू ने चढ़ाया है चढ़ावा वह तो तुम्हें मिलेगा,
किंतु तेरे द्वारा चढ़ाया हुआ एक भी चढ़ावा प्रभु लेगा नहीं|
-मनस्व
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X