नीति कभी भी अनीति बनने ना पाए,
और अनीति भी कभी भी नीति बनने ना पाए,
जनता की आवाज रहे सदा जनता की आवाज,
जनता की आवाज कभी भी राजनीति बनने ना पाए|
-मनस्व
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X