सचमुच जो नेता पहन कर के दिन रात मेहनत और ईमानदारी का खोल,
पीट रहा हो बराबर देश की बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था और विकास का ढोल,
यदि वही नेता कहे कि मेरा क्या मैं तो खाली झोला उठाकर चल पड़ूंगा,
तो जनता को समझ लेना चाहिए कि देश की हालत है कितनी डावांडोल|
-मनस्व
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X