बसा रहे जन-जन के हर एक धड़कन में और हर एक सांस में,
झूठ चाहता है कि वह भी रहे अंकित सदा स्वर्णिम इतिहास में,
किंतु झूठ की यह तमन्ना तो तैसे तैसे धूमिल पड़ती जाती है,
जैसे-जैसे सबका प्यारा सच आता जाता है इस झूठ के पास में|
-मनस्व
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