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मुक्तक विन्यास में एक तेवरी

                
                                                         
                            बस्ती में आग लगा देगा
                                                                 
                            
शोलों को और हवा देगा,
वो धर्म-धर्म चिल्लाता है
इंसां का खून बहा देगा ||

उलझन को और बढ़ा देगा
सच को झट झूठ बना देगा,
उसकी हर बात सियासी है
वो सबको सिर्फ दगा देगा |

मुजरिम को नहीं सज़ा देगा
जनता का काट गला देगा,
उसको भाता है क़ातिल ही
वो मंत्री उसे बना देगा |
-रमेशराज
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एक घंटा पहले

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