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मानवता के पथ सृजन में

                
                                                         
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मानवता के पथ सृजन में
अहंकार का त्याग करो
प्रेम और सद्भाव वृत्ति से
जीवन का श्रृंगार करो,
स्वार्थ लोभ दुर्गुण को त्यागो
सुंदर कर्म विधान करो
साहस बल श्रम धैर्य कर्म से
मातृभूमि को प्यार करो,
जीवन के इस अहम डगर पर
कुछ पल तो रुक कर देखो
दिख जाएंगे सब अपनों सा
मिलना तो स्वीकार करो
कुछ अनबन मजबूर जनों को
नेक इरादों से रोको
रुक जाएंगे चलने वाले
मन अपना तो साफ करो
कुछ भटके हैं पर से राही
वे भी लौट ही आएंगे
अपनों जैसे प्यार उन्हें भी
करने का तो काम करो।
-रामवृक्ष बहादुरपुरी
 
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2 महीने पहले

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