मन करता है!
मन करता है मैं बंध जाऊं
तेरे प्यार के बंधन में
जैसे मेरी बंधी कलाई
सुंदर सुंदर कंगन में
नाम का तेरे पहनूं सिंदूर
काजल भी हो नैनन में
चूनर भी हो नाम का तेरे
बाली भी हो कानन में
घुंघरू हो जो पांव में तेरे
नाम पुकारे तेरा
अगर चलूं दो चार कदम भी
ले लूं सातों फेरा
हर सांसों में मैं बस जाऊं
बस जाऊं स्पंदन में
मन करता है मैं बंध जाऊं
तेरे प्यार के बंधन में।
-रामवृक्ष बहादुरपुरी
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