स्नेह भरा आंचल
दुःख दर्द का अम्बर हो
मोती झरते जिसमें
आंसू का निर्झर हो,
स्नेह भरा आंचल
दुःख दर्द का अम्बर हो
मुस्कान भी चेहरे की
रोशन थी तारों सी
खिलते पुष्पों सा मन
जज्बात बहारों सी
टूटे मोती सा बिखरी
हो गयी प्रस्तर हो
स्नेह भरा आंचल
दुःख दर्द का अम्बर हो,
सूख गए हैं आंसू
हो गए शांत निश्छल
मर गये आज उर के
अगणित भावों के पल
तुम मातृशक्ति होकर
भी सबसे दूबर हो
स्नेह भरा आंचल
दुःख दर्द का अम्बर हो,
पतझड़ सी सूखी हो
सागर सी खारी हो
ममता के धागों की
मोती तुम प्यारी हो
पर जा जाने तुम क्यों
जैसे कि खंजर हो
स्नेह भरा आंचल
दुःख दर्द का अम्बर हो,
बरस रहा हर कोई
चिंगारी सा तुझ पर
इसलिए कि तू मां है
एहसान तेरा सब पर
लाख कोई कुछ कह लें
ममता की समन्दर हो
स्नेह भरा आंचल
दुःख दर्द का अम्बर हो,
-रामवृक्ष बहादुरपुरी
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