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एक सवाल - बांझ स्त्री पर कविता

                
                                                         
                            एक सवाल
                                                                 
                            

“ बांझ “
किसने बनाया यह शब्द,
“भगवान” या
भगवान के नाम पर “ इंसान ”
किसने ? निश्चित किया -
“ कोख “ से एक स्त्री की पहचान,
नहीं उठी अंगुलियां “ पुरुषों “ पर,
नहीं उठा सवाल “ मर्दानगी “ पर,
क्यों?
प्रार्थनाओं/ यातनाओं में केवल
मांगें गये “ पुत्र”
“ पुत्री ” क्यों नहीं ?
इस सामाजिक सोंच को क्यों?
जोड़ा गया “‘ ईश्वर ” से
कौन किया “ शिव “ “ शक्ति “ में भेद?
क्यों किया “ अर्धनारीश्वर “ स्वरूप के
अस्तित्व को अलग ?
बना रहने दो “ एकरूपता “ का समन्वय
मत बिगाड़ो प्रकृति का विधान।
-रामवृक्ष बहादुरपुरी
 
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एक महीने पहले

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