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राहों के मंज़िल

                
                                                         
                            पग-पग पर
                                                                 
                            
मिलते हैं अनेक मंज़िल।

रुकते हैं,
देखते हैं,
सोचते हैं,

फिर बढ़ते हैं______
एक नई मंज़िल की ओर

जुनून से भरे
चिर यौवन के मदमस्त मन,
अपने लक्ष्यों के साथ
चलते-चलते तय करते है, कई
अदम्य,
ऐतिहासिक,
रहस्यमय पड़ाव के
छावनी को_____

हर पड़ाव पर पाते हैं
नई सीख,
नया अनुभव,
और नए उत्साह के सांसो के साथ
फिर बढ़ चलते है,
एक नई मंज़िल की ओर ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 घंटे पहले

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