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मां स्कन्दमाता

                
                                                         
                            शक्ति का पांचवा स्वरूप स्कन्दमाता कहलाता है।
                                                                 
                            
नवरात्रि के पांचवे दिन इनको ही पूजा जाता है।।
तारकासुर के आतंक से सारा ब्रह्माण्ड परेशान था।
मारा जाएगा शिवपुत्र के हाथों ब्रह्मा का वरदान था।।
दक्षसुता के सती होने पर शिव जी हो गए वैरागी।अविवाहित ही हुए समाधिस्थ बन ब्रह्म के अनुरागी।।
देवताओं के अथक परिश्रम से शिवपार्वती विवाह हुआ।
शिव वीर्य से उत्पन्न बालक स्कन्द का गंगा प्रवाह हुआ।।
जब पार्वती ने अपनाया बालक को स्कन्दमाता कहलाई हैं।
देवताओं का सेनापति बना तारकासुर का बध करवाई हैं।।
स्कन्दमाता का आसन है कमल तो पद्मासना भी कहते हैं।
संतान-सुख, आरोग्य के लिए मां की उपासना करते हैं।।
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12 घंटे पहले

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