मां का नवां स्वरूप माता सिद्धिदात्री कहलाता हैं।
नवरात्रि का नौवें दिन इनको ही पूजा जाता है।।
ब्रह्माण्ड रचाने को मां कुष्माण्डा ने अवतार लिया।
धारकर सिद्धिदात्री स्वरूप है उसका विस्तार किया।।
त्रिदेवों ने करी तपस्या मां का है आह्वान किया।
हुईं प्रसन्न हैं उनके तप से सिद्धि का बरदान दिया।।
ब्रह्मा को बनाया सृजनहार विष्णु को पालक परमेश्वर।
शिव में स्वयं समाहित होकर उन्हे बनाया अर्धनारीश्वर।।
जो भी भक्त धर्म-परायण होकर मां की सेवा करता है।
होते हैं सब दु:ख दर्द दूर जीवन में आगे बढ़ता है।।
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