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बालि-सुग्रीव

                
                                                         
                            किष्किंधा में रहते थे दो बानर अलबेले।
                                                                 
                            
होते हुए सहोदर भाई थे दोनों सौतेले।।
सूर्य पुत्र सुग्रीव व इन्द्र पुत्र था बाली।
हमशक्ल थे दोनों भाई और बहुत बलशाली।।
एकबार रावण बालि से पंगा लेने आया।
बांध पूंछ से दाब कांख में पूरा विश्व घुमाया।।
मार दुंदुभी राक्षस को शत जोजन दूर जो फेंका।
गिरे मांस के टुकड़े व रक्त को मतंग ऋषि ने देखा।।
दिया श्राप बालि को जो ऋष्यमूक पर आया।
कर दूंगा भष्म तुझे यह सुन बालि पछताया।।
मायावी राक्षस ने जब बालि को ललकारा।
दौड़ा गया है लड़ने उससे मना किया जो तारा।।
मायावी घुस गया गुफा में अपनी जान बचाने।
सुग्रीव तुम करो प्रतीक्षा आता हूं मायावी 4को लगा ठिकाने।।
 
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2 महीने पहले

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