आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

इस देश को पहचान ले

                
                                                         
                            ये गुलशन है तेरा, इन फूलों पर ऐतबार कर ले
                                                                 
                            
ये आसमां है तेरा, इस सुबह को सलाम कर ले

पहले ख़ुद से निकल, फिर दुनिया को जान ले
पहले नींद से जाग, फिर इस देश को पहचान ले

जो तुझे चलना सिखाए, उन्हें यशोदा मान ले
जो आयत तुझे इंसाँ बनाए, परब्रह्म उसमें जान ले

दिल का आईना साफ़ रहे, दुनिया नई बसा ले
ये माटी महकती रहे, काँटों को भी अपना ले

जहाँ रोशनी बहे, उन निगाहों में गोकुल जान ले
जहाँ प्रेम बसे, उन धड़कनों में कान्हा पहचान ले

केसरिया दिल फ़रिश्ते जैसा, सफ़ेद मन हिमालय जैसा
हरे ख़्वाब विंध्या जैसे, इस गुलदस्ते को दिल में उतार ले
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
9 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर