कोई लम्हा तुम्हारी ज़िंदगी का हाथ आ जाए.
कहीं से रोशनी का एक कतरा हाथ आ जाए.
सभी साहिल पे बैठे हैं, न दरिया पार कर पाये,
हवायें तेज़ थीं, पतवार उनके हाथ आ जाए.
हवा में तेज़ उड़ते हैं, जो पत्ते टूट जाते हैं,
न ऐसे हो ज़ुदा कोई, हमारे साथ आ जाए.
सवालों से न घबराओ, इन्हें आसान कर लेंगे,
कठिन है ज़िंदगी, उत्तर कोई तो हाथ आ जाए.
लिखा मज़मून जो तुमने उसे एक रोज़ पढ़ लेते,
अगर तरक़ीब पढ़ने की हमारे हाथ आ जाए.
भ्रमर तेरी ग़ज़ल लिखता तरन्नुम में उसे गाता,
तुम्हारे हाथ की तक़दीर उसके हाथ आ जाए.
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