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सीना छलनी हम कर देंगे

                
                                                         
                            दम नहीं थी सामने से इसलिए,
                                                                 
                            
मारकर शेरों को चोरों की तरह,
छुप गया बीवी के जाके गोद में,
जिंदगी से कर लिया खिलवाड़ तू ।

बहुत हुआ अब वार्तालाप,
बहुत हुआ अब सन्धि और समझौता ।
अपनी औकात जाओगे भूल,
बेसब्री अब तनिक नहीं कर सकता ।

सीना छलनी हम कर देंगे ।
सीना छलनी हम कर देंगे ।

घुस-घुस कर सबको ठोकेंगे,
चिथड़े-चिथड़े अब कर देंगे ।
तुम भागे राह न पाओगे,
जब तेरा पीछा कर लेंगे,
सीना छलनी हम कर देंगे ।

जैसे घुस-घुस कर ठोंका था,
बच्चा-बच्चा तब रोया था ।
इतिहास रहा प्रत्यक्ष साक्ष्य,
वैसे अबकी भी ठोकेंगे,
सीना छलनी हम कर देंगे ।

हे दुष्ट पाक!अब तो सुधरो,
यह बचा हुआ जीवन जी लो ।
अन्यथा प्रेत बनकर घूमों,
इतिहास स्मरण तुम कर लो ।

बहुतों को प्रेत किया हमने,
बहुतों की बली चढ़ाई है ।
जब-जब भी कोई युद्ध हुआ,
तब तुमनें मुँह की खाई है ।

तू कहाँ पड़ा किस चक्कर में,
तू कभी नहीं था टक्कर में ।
तब तुम्हें कहीं का छोड़ा था,
अब नहीं कहीं के छोड़ंगे,
सीना छलनी हम कर देंगे ।

सीना हम छलनी कर देंगे,
सीना छलनी हम कर देंगे ।।


रजनीश द्विवेदी
एम.ए.(हिन्दी)इलाहाबाद विश्वविद्यालय,प्रयागराज






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7 वर्ष पहले

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