बेशक़ीमती धरोहर मिली हैं हमें
बुज़ुर्गों के हाथ की,
तस्वीरें हैं ये ज़िन्दा गुज़रे वक़्त के
वक़ार की,
आऐंगी नस्लें हमारे बाद भी
इस ज़मीन पर ,
क्या निशानियाँ छोड़ेंगे हम पीछे
अपने कमाल की?
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