अकेले चलने में क्या मज़ा गर
साथ कोई न आएगा,
अपना मुक़द्दर सब साथ लाते,
जाने कौन क्या पाएगा,
थाम कर हाथ में हाथ निकलिये
सफर को ज़रा,
जाने किसकी क़िस्मत का लिखा
किसकी क़िस्मत में आएगा.
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