तू अकेला तो नहीं,
हिस्सेदार बहुत हैं इस दुनिया के,
इतना मासूम नहीं तू,
इल्ज़ाम बहुत हैं इस दुनिया के,
एहसास-ए-ज़िम्मेदारी,
न तुझमें है न तेरी दुनिया में,
पर शिक़ायतें हैं बहोत,
इन बाशिंदों को तेरी दुनिया के.
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