दर्द भी होता है मुझे,
भूख भी बहुत है,
ऊंचाइयां छूने के भी
अरमान बहुत हैं,
उनकी नज़रों में हूँ मैं महज
मौसमी टिड्ढ़ा,
भूल जाते हैं वो अक्सर मेरी,
पैदाइश बहुत है.
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