मैं फूल हूँ मुझे संभालकर अपने
साथ रखिये,
कुम्ल्हा जाऊँ तो एहतियात से
क़िताब में रखिये,
देता रहूँगा सूखकर भी ख़ुश्बुऐं
लम्हों की यदाकदा,
ख़ुशनुमा पल हूँ मुझे दिल के
पन्नों में सजा कर रखिये.
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