तुम आज़ाद थे आज़ाद हो आज़ाद रहोगे
जन जन के दिलों में सदा आबाद रहोगे
दिल में दुआ बनके लबों पे फरियाद रहोगे
तुम आज़ाद थे आज़ाद हो —-
मध्य प्रदेश के अलीराजपुर में गाँव था भावरा
23 जुलाई को जन्मा था वहाँ आजादी का बावरा
जोश जज्बा दिल में तुम्हारी रगों में जुनून था
धधकते थे भाव तुममें उबलता खून था
तुम गांधी के अनुयायी थे परंतु रास्ता अलग था
इंकलाब था पथ तुम्हारा अहिंसा से विलग था
कसम खाई थी तुमने वतन को आज़ाद करेंगें
आज़ाद थे आज़ाद हैं और आज़ाद ही मरेंगे
तुम्हारी एक हूंक से शत्रु थर थर कांपे थे
प्राण तजने से पहले तुमने कई अंग्रेज नापे थे
निभाया तुमने वादा ना मोह तन का किया
जो किया हुंकार कर अपने मन का किया
तुम शीर्ष शिखर चंद्र थे भारत मां के भाल के
तुम ज्वलंत चिंगारी थे क्रांति की मशाल के
जोश होश हिम्मत जज्बा तुममे कमाल था
पाकर तुमसा लाल पूरा भारतवर्ष निहाल था
भला चुका पाएंगे कैसे तुम्हारे इस कर्ज को
आशीर्वाद देना रखें सदा याद हम फर्ज को
तुम्हारे प्रति सम्मान के मुझमें भाव सदा रहे
शीश झुका कर चरणों में राजीव जय तुम्हारी कहे
तुम रोशनी से भरे गगन के मेहताब रहोगे
जन जन के दिलों में सदा आबाद रहोगे
दिल में दुआ बनके लबों पे फरियाद रहोगे
तुम आज़ाद थे आज़ाद हो आज़ाद रहोगे
- राजीव त्यागी
महान हुतात्मा चंद्रशेखर आज़ाद की
जयंती पर सादर चरण वंदन
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