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याद आती है

                
                                                         
                            याद आती हुई ख़ुशबू की तरह
                                                                 
                            
दिल को महकाए रखती है,
दूर रहकर भी जाने क्यों
पास बुलाए रखती है।

बीते लम्हों की नरम धूप-सी,
मन पर उतरती रहती है,
सूनी आँखों के आँगन में
चुपके सपने भरती है।

कभी हवा के झोंके बनकर,
कभी चाँदनी बन जाती है,
तेरी याद की एक आहट
सारी रात जगाती है।

वक़्त भले ही दूर करे पर
रिश्ता कहाँ मिटता है,
सच्चा प्रेम तो ख़ामोशी में
और गहरा हो जाता है।

याद आती हुई ख़ुशबू की तरह
दिल को महकाए रखती है,
तू मेरी साँसों में अब भी
अपना मौसम लाए रखती है।

- राजेश्वरी
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3 घंटे पहले

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