धूप बहुत है इस ज़िंदगी में,
कुछ पल छाँव में भी तुझे बैठना चाहिए।
कौन पूछेगा हाल तुम्हारा,
अपने आँसू तुझे खुद ही पोंछने चाहिए।
काँटों भरी है ये डगर सारी,
तुझे नीचे देख कर चलना चाहिए।
लोग मतलब के हमसफ़र हैं सब,
तुम्हें अकेले ही सफ़र करना चाहिए।
शाम ढले जब सन्नाटा छाए,
तुझे घर चले आना चाहिए।
टूटे अरमानों के कश्कोल से लूटे कितने मोती,
कभी कभी उसे भी गिनना चाहिए।
क्यों दिल पर लेते हो कुछ बातों को,
बातें हैं, बातों की तरह भूल जाना चाहिए।
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