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सौ नंबर लाकर भी आखिर वो गद्दार निकली

                
                                                         
                            झूठी मुस्कान सूरत भोली,
                                                                 
                            
फ़ितरत बड़ी मक्कार निकली।

गला काटा इसने मगर ,
कत्ल की गुनहगार बस तलवार निकली।

मुस्करा कर किया नमस्कार फिर
घर की ओर निकली।

सुना है शिक्षक ने उसे बफा का पाठ पढ़ाया था।
सौ नंबर लाकर भी आखिर वो गद्दार निकली।

सोचता हूँ मैं कि -
जिसको हमने बफा के पाठ पढ़ाये थे,
इंसानियत के किस्से जिसे हर रोज सुनाये थे।

वफ़ा इन्होने किताबों की बात समझ कर पढ़ी थी,
लेकिन बात उससे कहीं अधिक बड़ी थी।

ताउम्र खर्च करके कुछ पूंजी कमाई है।
कुछ ने प्यार दिया, कुछ में बस नफ़रत समाई है।
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3 महीने पहले

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