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प्रेम कहाँ कर पाऊँगा ?

                
                                                         
                            खुद झोपड़े में रहता हूँ ,
                                                                 
                            
महल कहाँ बना पाऊँगा ?
बेरोजगार हूँ ,
प्रेम कहाँ कर पाऊँगा ?

तुम मागोगी चाँद तारे
मैं दे कहाँ पाऊँगा ?

तुम्हें दुनियाँ घूमने की होगी चाह,
मैं तुम्हें कहाँ घुमा पाऊँगा ?

तुम्हारे सपने में तो आते होंगे राजकुमार
मैं कहाँ आऊंगा ?

तुम कहोगी—“कुछ तो लाओ,”
मैं अपना चेहरा छुपाऊँगा।

बेरोज़गार हूँ,
प्रेम कहाँ कर पाऊँगा ?

जब पूछेंगे पिता तुम्हारे
तो तनख्वाह क्या बताऊंगा ?

बेरोजगार हूँ
क्या तुम्हारा हाथ माँग पाऊँगा ?

लग रहा है कि
मैं कुँवारा ही मर जाऊंगा।
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3 महीने पहले

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