घटाओ को बरसने दो, सावन का नाम लेकर।
इस फिजां को महकने दो,खुश्बु का पैगाम कहकर।
कोयल को कूकने दो,बसंत का पयाम देकर।
फूलों को मुस्कुराने दो,शबनम का दुलार देकर।
इस काली रात को पूनो बना दो,चांद सितारों का प्रकाश देकर।
इक पाषाण को वाचाल बना दो,पूजा का उस पर पृसाद लुटाकर।
जीवन के सूनेपन को सजा दो,अपनी चाहत के रंग भरकर।
चाहत को अमर बना दो, दोस्ती का एक देकर।
भटके राही को राह दिखा दो, मंजिल की एक झलक दिखाकर।
थकते कदमों को विराम दे दो,जिंदगी को एक मुकाम देकर।
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